विवेकानंद के अनुसार, शिक्षा का मुख्य उद्देश्य चरित्र निर्माण होना चाहिए। उनका मानना था कि ज्ञान केवल तथ्यों को रटने तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि उससे मनुष्य का नैतिक और आध्यात्मिक विकास होना चाहिए।
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विवेकानंद के अनुसार, शिक्षा का मुख्य उद्देश्य चरित्र निर्माण होना चाहिए। उनका मानना था कि ज्ञान केवल तथ्यों को रटने तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि उससे मनुष्य का नैतिक और आध्यात्मिक विकास होना चाहिए।
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